piles treatment without surgery Things To Know Before You Buy
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बवासीर के लिए कौन-कौन से घरेलू उपाय सबसे प्रभावी हैं?
इसे रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ लें।
क्या आयुर्वेदिक उपचार बवासीर का स्थायी इलाज कर सकता है?
यह अवस्था शुरुआती है, समय पर घरेलू उपायों और सही आहार से शामल की जा सकती है।
इस घरेलू उपचार के लिए आपको चाहिए की कड़वी तोरई का रस निकालकर उसमे थोड़ी हल्दी और नीम का तेल मिलाकर लेप बना लीजिये और प्रतिदिन पाइल्स के मस्सों पर लगाइये ऐसा करने से पाइल्स के मस्से जड़से खतम हो जाते हैं।
शरीर को डिटॉक्स करने के लिए सप्ताह में एक बार व्रत करें।
फाइबर युक्त आहार, भरपूर पानी, मल त्याग के बाद सफाई, और तनाव कम करना उपचार के आवश्यक भाग हैं।
आयुर्वेद में बवासीर को ‘अर्श’ कहा गया है। यह वात, पित्त एवं कफ तीनों दोषों के दूषित होने से होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग कहा गया है। जिस बवासीर में वात या कफ की प्रधानता होती है, वे अर्श शुष्क होते हैं। इसलिए मांसांकुरों में से स्राव नहीं होता है। जिस अर्श में रक्त या पित्त या रक्तपित्त की प्रधानता होती है, वे आर्द्र अर्श होते है। इसमें रक्तस्राव होता है। शुष्क अर्श में पीड़ा अधिक होती है।
पीड़ित व्यक्ति को मल त्यागने में ब्लीडिंग हो सकती है।
वजन प्रबंधन : आहार और व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखने से गुदा और मलाशय में नसों पर दबाव कम करता है। इस वजह से बवासीर के विकास के जोखिम को कम किया more info जा सकता है।
नागकेसर: रक्तस्राव को रोकने में सहायक।
इसमें से खून और मवाद लगातार निकलता रहता है। शुरुआती अवस्था में इसमें मवाद और खून की मात्रा कम होती है। इसलिए इससे रोगी के वस्त्रों में केवल दाग मात्र लगता है। धीरे-धीरे रिसाव बढ़ता जाता है, और रोगी को खुजली, बेचैनी और दर्द होने लगता है।
सिट्ज़ स्नान बवासीर के दर्द, जलन, और सूजन में राहत प्रदान करता हैं, लेकिन इसके साथ अन्य उपचार की भी आवश्यकता होती है।
आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है: